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فوقَ
السكّةِ
سارَ
قطاري
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
أسـرَعُ
مـن
كلِّ
الأطيــارِ
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
ويَـلـفُّ
الدنيا
مســرورا
يعمــلُ
في
ليـلٍ
ونهارِ

ما
أحلى
ألوانَ
قطاري
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
زاهيــةً
مثــلَ
الأزهـــارِِ
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
هيّــا
لنلــــوّحَ
ونغنــــي
أهــــلاً
أهــلاً
بالـــزوّارِ
***
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
جـاء
قطاري
مـن
بيروت
يحمل
لُـعَبَاً
يحملُ
ورداً
يحملُ
حلوى
يحملُ
توت
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
تشك
ِ
تشك
ِ
تــــُـــوت
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